भक्ति की शक्ति

भक्ति की शक्ति

एक रात मैंने सपना देखा| नदी के रेतीली किनारे पर मै और मेरे भगवान चल रहे हैं, साथ में दो जोड़ी पांवों के निशान दूर तक अंकित है रेत पर| एक तो मेरे और दूसरे मेरे भगवान के, तभी देखता हूँ कि आकाश के विराट परदे पर दृश्य उभरने लगे मेरे अतीत के| मैंने देखा यह क्या नदी के रेतीली किनारे पर एक जोड़ा पांवों का निशान अंकित है| तभी मुझे याद आया ये तो वे दिन थे, जब मेरा दुर्भाग्य था अपने उत्कर्ष पर मैंने आहत हो प्रश्न किया|

तुमने तो कहा था ना जीवन भर साथ दोगे मेरा, मेरे कर्णधार बन और तुमने मुझे छोड़ दिया कि निपट अकेले, जबकि मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरुरत थी|

भगवान मुस्कुराएँ…… धीरे से बोले…… मेरे बच्चे मैंने तुम्हे कभी छोड़ा नहीं, यह जो दो पैरों के निशान देखते हो न| वह मेरे है…… दर्द के क्षण में गोद में उठाया था जब मै तुमको|

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