बेतिया: कुमारबाग थानाध्यक्ष राजीव कुमार रजक और समाजसेवी मनीष कश्यप ने रविवार को कुमारबाग चौक पे मास्क वितरण किया। साथ में बेवजह सड़कों पर घूम रहे लोगों को लॉक डाउन का पालन करने के लिए समझाया। वहीं जो बिना मास्क सड़कों पर घूम रहे थे, उन्हें मास्क भी दिया गया और मास्क के उपयोगिता बारे में बताया गया। थाना के सभी पुलिस को भी एक-एक अतिरिक्त मास्क दिया गया। थानाध्यक्ष राजीव कुमार रजक ने बताया कि हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्थानीय लोग लॉक डाउन के नियमों का पालन करें और अपने घरों में ही रहे। जो बेवजह सड़कों पर निकल रहे हैं हम उन्हें घर में रहने के लिए समझा रहे हैं। मनीष कश्यप ने बताया कि देश को कोरोना से बचाने के लिए सरकार, प्रशासन और डॉक्टर दिन रात मेहनत कर रहे हैं। हमारा भी फर्ज बनता है कि हम इनका भरपूर साथ दे। इसलिए आज हमने 500 मास्क का वितरण कुमारबाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत कराया गया। आगे भी हम अलग-अलग क्षेत्रों में मास्क का वितरण स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर करेंगे।

मास्क देते मनीष कश्यप व अन्य

बेतिया :युवा सेना के प्रदेश प्रमुख कुंदन पांडेय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्रकर लिख अनुरोध किया है कि जिस प्रकार पूरे देश और पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर मानव जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। पूरी दुनिया की आर्थिक हालत बेहद खराब है इसी को देखते हुए किसानों के गन्ने का सीघ्र भुगतान की जाए।किसानों को आर्थिक पैकेज,दो माह का बिजली बिल और छात्रों की दो माह की फीस माफ करने की मांग की है। श्री पांडेय ने लिखे पत्र मे कहा है कि किसानों का मुख्य आय कृषि है। कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया है। किसान अपना गन्ना मिलों में गिराकर घर मे बैठे है। इस समय किसानों को गन्ना भुगतान की सख्त जरूरत है। इसको देखते हुए चीनी मिल से एक सप्ताह के अंदर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान सुनिश्चित कराने का आदेश दिया जाय। नही तो ऐसे में किसानों भुखमरी का सिकार होने के कगार पर है। श्री पांडेय ने लिखा है कि ताजा परिस्थितियों में सरकार को किसानों को आर्थिक पैकेज व सभी लोगों के बिजली का बिल माफ किया जाए। लॉकडाउन की वजह से किसानों के फसल बर्बाद हो रहे है। वहीं लोगों के कारोबार बंद है, लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बंदी की वजह से लोगों के सामने परिवार चलाने का संकट है। ऐसे समय प्रदेश में घरेलू बिजली के कम से कम दो माह के बिलों को सरकार माफ कर दे। वही उन्होंने कहा कि प्रदेश में जितने भी प्राइवेट स्कूल हैं, उन्हें यह निर्देशित किया जाए कि वे अगले दो महीनों तक स्कूलों की फीस माफ करें। निजी स्कूलों को जो फीस को लेकर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं उन्हें रोका जाए।क्योंकि इस समय बच्चों की फीस जमा कर पाने में परेशानी होंगी।

कुंदन पांडेय, प्रदेश प्रमुख- युवा सेना बिहार
युवा सेना द्वरा मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र

बेतिया : पश्चिम चंपारण निवासी व ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय जयपुर के एजुकेशन एंड मेथाडोलॉजी के डीन एवं कोरोना पर अनुशंधान के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर गठित टीम के सदस्य डॉ. शोभा लाल ने बताया कि दुनिया में कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का प्रमुख कारण विटामिन-डी की कमी के रूप में भी सामने आया है। यह रिपोर्ट हमें भी सतर्क कर रही है, क्योंकि देश में भी बड़ी आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है। शरीर में विटामिन-डी की स्थिति बेहतर करके हम कोरोना वायरस के खतरे को कम कर सकते हैं। ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय के कुशल मार्गदर्शन में अनुसंधान के परिणाम को प्रकाशित करके देश के विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों को भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय के संस्थापक व सलाहकार तथा अनुसंधान टीम के मेंटर डॉ. पंकज गर्ग व उनकी टीम ने जो अनुसंधान के बाद मार्गदर्शिका जारी किया है। उसको अपना कर कोरोना से बचा जा सकता है। अध्ययन के दौरान ऐसा पाया गया है कि वायरस से मृत्यु का शिकार हुए मरीजों में विटामिन-डी की कमी मौत का प्रमुख कारण मिली। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में यह शोध प्रकाशित हो चुका है। इसके मुताबिक हड्डी-मांस पेशियों में दर्द विटामिन-डी की कमी का लक्षणभर है। विटामिन-डी का शरीर में मल्टीपल रोल है। यह फेफड़े का फंक्शन दुरुस्त रखने में मददगार है, जो कि संक्रमण से भी बचाने में कारगर साबित होता है। अनुसंधान टीम के सदस्य के अनुसार शरीर की कोशिकाओं में रिसेप्टर की बांडिंग होती है। विटामिन-डी इस बांडिंग को मजबूती प्रदान करता है। विटामिन-डी की कमी से सेल्स में मौजूद रिसेप्टर साइक्लिक एएमपी, ऑक्ट 3/4, पी 53 की बांडिंग में कमजोरी आ जाती है। यहीं मौका पाकर वायरस सेल में दाखिल हो जाता है। इसके बाद फेफड़े तक पैठ बनाकर शरीर पर हमला करता है। ऐसे में यदि विटामिन-डी शरीर में ठीक है, तो वायरस से मुकाबला आसान हो जाएगा।

बेस्ट डायरेक्टर और डीन के रूप में चयनित हुए डॉ. लाल
डॉ. शोभा लाल

बेतिया : शहर के आरएच स्टोन हॉस्पिटल सह गोवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के डॉ. हिदायतुल्लाह का कहना है कि युवाओं का रवैया उचित नहीं है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए ही लॉक डाउन किया गया है। लॉक डाउन के नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। युवा लोग अक्सर सड़कों पर निकल आते हैं। वे यह न समझें कि यह वायरस उन्हें अपनी चपेट में नहीं ले सकता। यह भ्रांति बिल्कुल न पालें। अपना और अपने परिवार के बुजुर्गों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। बेवजह सड़कों पर न निकलें। वायरस से बचाव के लिए जैसे निर्देश दिए जा रहे हैं, उनका कड़ाई से पालन करें। यह युवाओं और उनके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने जो 21 दिनों तक लॉक डाउन के दौरान सामाजिक दूरी बनाने और अपने घरों पर ही रहने का आह्वान किया है, उसका पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। कोरोना से बचाव आपके ही हाथ में है। जनता क‌र्फ्यू और लॉकडाउन का नियम इसलिए बनाया गया ताकि लोग एक दूसरे के संपर्क में न आएं। कोरोना वायरस साधारण फ्लू का ही एक रूप है। यह वायरस इंसान के नाक, मुंह व आंख के जरिए गले में पहुंचता है और चार दिन गले में रहकर इंसान की कोशिकाओं पर प्रहार कर देता है। इसके अलावा जिस जगह पर वह वायरस विद्यमान है उसे छूने पर भी इंसान संक्रमित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार यह वायरस शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखाने में 14 दिनों का समय ले सकता है। हालांकि ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि संक्रमण का प्रकोप 24 दिन तक रह सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि लोग खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें। बार-बार साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोते रहें। अब जबकि कोरोना तेजी से फैल रहा है तो किसी भी वस्तु को छूने के बाद फौरन हाथ धोएं। इस वायरस की अभी कोई प्रभावी दवा ईजाद नहीं हो पाई है, इसलिए घरों पर रहें, सुरक्षित रहें।

निशुल्क चिकित्सा शिविर में मरीजों का हुआ इलाज

बेतिया: शहर के मित्रा चौक स्थित नोवा गैस्ट्रो एंड सर्जरी क्लिनिक द्वारा निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 100 के करीब मरीजों का निशुल्क इलाज किया गया। इसके साथ ही उन्हें दवाइयां भी वितरित की गई। यही नहीं शिविर में मरीजों का शुगर टेस्ट भी मुफ्त में करवाया गया। जानकारी देते हुए डॉ. राशिद सिद्दीकी ने बताया कि चिकित्सा शिविर में हृदय, छाती, बुखार व थायराइड के मरीजों का इलाज किया गया।इसके साथ-साथ मरीजों को प्रदूषण से बचने की सलाह दी। वहीं मौसमी बीमारी से बचाव के उपाय के साथ-साथ
उन्होंने मरीजों को मौसमी बीमारी बुखार, मलेरिया,खासी, उल्टी दस्त आदि से बचाव के उपाय बताए। डा. सिद्दीकी ने बताया कि वर्तमान में मौसम के बदलाव होने के कारण बीमारी पैदा हो रही है। इसलिए अपने घरों के आसपास गंदगी न होने दें। बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र के ग्रामीणों में कार्यरत उन गरीब कामगारों की सहायता करना है जो कि पैसा खर्च करके अपना इलाज नहीं करवा सकते। उनके पास ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आए थे। ज्यादातर मरीजों में पेट रोग के मरीज पाए गये। वही डॉ. इफ्तेखार ने मरीजों से दावा के साथ आहार पर विशेष ख्याल रखने की सुझाव दी। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए व्यायाम एवं हरी सब्जी दूध नियमित सेवन पर विशेष बल दिया। मौके पर डीके शुक्ला, विकास मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, तंजीर आलम मौजूद रहे।

How to weight gain and manage your health

क्या आपका health बहुत ही down है? क्या आप Weight gain करना चाहते है? या आपको healthy होना चाहते है | आप अपना health  को ठीक करना चाहते है या अपने आप को फिट रखना चाहते है|

 

अगर आप अपना health Gain करना चाहते है तो आप बिलकुल सही जगह पर है| यहाँ हम आपको health Gain करने का सबसे बेहतर Tips बताएँगे जिससे आप खुद को बिलकुल Fit कर सकते है|

 

जैसा कि आप जानते है की अत्यधिक मोटापे की तरह अत्यधिक दुबलापन भी हमारे सेहन के लिए हानिकारक होता है| जब हम ज्यादा दुबले हो जाते है तो हम सोंचते है कि हम तला हुआ या फास्टफूड खा के अपनी सेहत बना सकते है लेकिन ये तरीका बिलकुल गलत है|

 

क्यूंकि आप जब फास्टफूड या तला हुआ खाना खाते है तब आपकी पाचनशक्ति को ऐसे भोजन को पचाने में बहुत problem होती है और इस तरह से आपकी पाचनक्रिया ख़राब हो जाती है और आप बीमार पड़ जाते है|

 

Required Foods for Weight Gain

यहाँ हम आपको कुछ weight gain के लिए Tips बताएँगे जिसे आप रोज Follow करके आसानी से health ठीक कर सकते है|

 

आप 2 मोटी और बड़ी size का या 3 छोटे size का केला ले केर उसे काट ले| अब आप 2 चम्मच किशमिश रख ले और एक गिलास दूध ले ले| अब दूध, केला और किशमिश का सेक बनाये और फिर इसमें 2-3 इलाइची को powder बना के मिलाये और रोज सुबह में इसका सेवन करे|

 

  • केला में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और पोटैशियम होता है जो हमे Energy देता है और हमारे weightको बहुत ही जल्दी बढ़ता है|
  • दूध में rich amount of protein होता है जो हमारे Body को तेजी से grow होने में मदद करता है|
  • किशमिश में Faty Acid होता है| इसमें Soluble Dietary fiber, Vitamin और Minerals होता है जो हमारे health को promot करता है|
  • इलाइची हमारे immunity system को boost करता है और हमारे पाचन क्रिया को भी improve करता है|

 

Health chart for weight gain

Diet Chart for weight Gain

 

अगर आप सच में अपना weight gain करना चाहते है तो आपको अपना एक Diet Chart जरुर चाहिए| और उस चार्ट को daily Follow करना चाहिए|

 

  • सुबह उठ के आप Exercise करे और exercise के तुरत बाद जैसा की मैंने आपको ऊपर बताया ठीक उसी तरीके से Shake बनाये और उसे पिए ऐसा करने से आपका Energy loss नहीं होगा|
  • सुबह में 8 बजे तक heavy breakfast करे|
  • ब्रेकफास्ट और lunch के बीच में आप एक bawl में Healthy दाल खाए| दाल को पत्ता गोभी, पालक का पत्ता, टमाटर डाल के बनाये|
  • दिन में 12 बजे तक lunch कर ले| खाना हमेशा पेट भर के खाए|
  • Dinner से पहले आप 2 egg daily खाए| Dinner early night करे|
  • अगर आप शाकाहारी है तो आप पनीर या सोयाबीन खा सकते है|
  • खाने के बाद चाए या कॉफ़ी बिलकुल नहीं पिए और रात को एक ग्लास दूध जरुर पिए|
  • खाना टाइम पर खाए और पर्याप्त मात्र में खाए|
  • खाना के साथ-साथ exercise जरुर करे| इससे आपके body में जो foods है, उसके essential nutrients को आपका body absorb करेगा, और खाना पचाने में मदद करेगा|
  • नींद पर्याप्त मात्र में ले अर्थात अच्छे से सोये और अगर आपको नींद आने में दिक्कत होती है तो रोज एक ग्लास दूध में थोडा सा हल्दी डाल के सोने से पहले इसका सेवन करे|

 

 

अगर आप बहुत ही ज्यादा दुबले है और जल्द-से-जल्द health recover करना चाहते है तो आप Date (खजुर) का सेवन करे| रोज कम-से-कम 8 खजुर खाए| और अगर आप अब भी संतुस्ट नहीं है तो खजुर को गरम करे और उसमे गाये का घी साल के खाए|

 

अतः इस tips को follow करके आप बहुत जल्दी अपने सेहत को ठीक कर सकते है और अपना weight gain कर सकते है|

 

 

Sauna Bath आपके Health के लिए है बहुत ही लाभकारी अतएव यह वजन कम करने के साथ-ही-साथ आपको रक्तचाप से होने वाले मौत से भी सुरक्षा करेगा|

सप्ताह में 4 से 7 दिनों के (SAUNA BATH) सॉना स्नान का दौरा करने वाले लोग सप्ताह में सिर्फ एक बार जाने वाले लोगो की तुलना में स्ट्रोक का 61% कम जोखिम दिखता हैं|

 

फिनलैंड में लोग, जो नियमित रूप से सौना स्नान (SAUNA BATH) करते हैं, उन लोगों की तुलना में बहुत कम लोग स्ट्रोक जैसे भयानक जोखिम का सामना करते हैं, जैसा कि बुधवार को फ़िनलैंड के एक अध्ययन सभा में कहा गया था।सॉना स्नान फिनलैंड की संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। फिनलैंड की 54 लाख की जनसंख्या में 30 लाख से भी ज्यादा सॉना हैं, जिसका मतलब है कि हर घर में औसतन कम से कम एक सॉना है। फिनलैंड के लोग हमेशा से मानते हैं

 

Sauna Bath  के बहुत से स्वास्थ्यवर्धक लाभ हैं-

 

ऐसा स्नान करने से शरीर में रक्त का संचालन अच्छा होता है और  तनाव से मुक्ति मिलती है जो दिल को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करता है।

मांसपेशियों को आराम मिलने के कारण यह अर्थराइटिस के रोगी को दर्द से कुछ हद तक राहत दिलाने में भी बहुत मदद करता है।

इस प्रकार से स्नान से शरीर का तापमान बढ़ जाता है जिससे रक्त वाहिकायें (blood vessels) खुल जाती है। जिसके कारण शरीर से विषाक्त पदार्थपसीना के रूप में बाहर निकल जाता है।

पसीना निकल जाने के कारण यह त्वचा को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।

इस स्नान से शरीर के मांसपेशियों को आराम मिलता है जिसके कारण एन्ड्रोफिन्स (endorphins) निकलता है जो अच्छी नींद आने में मदद करता है।

सॉना स्नान के दौरान पसीना के रूप में ऊर्जा या एनर्जी काखपत होता है। फैट और कार्बोहाइड्रेड का खपत इस ऊर्जा के संचार में खत्म होने से यह वज़न घटाने के प्रक्रिया में मदद करता है।

जर्मन के वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार स्टीम बाथ करने से इन्फ्लूएंजा और कोल्ड के कष्ट को भी कुछ हद तक राहत पाया जा सकता है।

इन सबके अलावा सॉना स्नान दिल की बीमारी से होने वाले मौत को खतरे के संभावना को कम करने में मदद करता है।

 

निष्कर्षतः जनसंख्या आधारित कुओपियो इस्केमिक हार्ट रोग जोखिम फैक्टर (केआईएचडी) अध्ययन पर आधारित हैं और फिनलैंड के पूर्वी हिस्से में रहने वाले 53 से 74 वर्ष की आयु के 1,628 पुरुष और महिलाएं शामिल है| शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यायाम, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और मधुमेह सहित स्ट्रोक जोखिम को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों के समायोजन के बाद भी लाभ जारी रहा|

 

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के अध्यापक लेखक सेटर कुनसुटर ने कहा, “ये परिणाम रोमांचक हैं क्योंकि वो लोग जो विश्राम और आनंद के लिए Sauna का उपयोग करते हैं, वे आपके संवहनी स्वास्थ्य पर भी लाभकारी प्रभाव डाल सकते हैं।”

“सौना में रक्तचाप कम करने का असर पड़ता है, जो स्ट्रोक जोखिम पर लाभकारी प्रभाव को कम कर सकता है।”

पिछले अध्ययनों ने सौना उपयोग को उच्च रक्तचाप,  डिमेंशिया और कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को मृत्यु के लिए कम उत्तरदायी ठहराया है|

 

फिनलैंड के पूर्वी हिस्से में 53 से 74 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को नामांकित किया गया|

उम्र, लिंग, मधुमेह, बॉडी मास इंडेक्स, रक्त लिपिड, शराब की खपत, शारीरिक गतिविधि और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे परंपरागत स्ट्रोक जोखिम कारकों को ध्यान में रखते हुए भी सहयोग जारी रहा। पुरुषों और महिलाओं में संघ की ताकत समान थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों को सौना से बचना चाहिए, जिनमें हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था, अस्थिर एंजेना वाले लोग, और कम रक्तचाप वाले बुजुर्ग लोग।

 

 

फोन स्कायर: क्या आपका फोन आपके मस्तिष्क को ज़प कर रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि घातक मस्तिष्क ट्यूमर में बढ़ोतरी के लिए मोबाइल को दोषी ठहराया जा सकता है

मोबाइल फोन के संभावित संदिग्ध होने के साथ, हमारे “व्यापक पर्यावरणीय या जीवनशैली कारक” इस प्रवृत्ति के लिए जिम्मेदार होने की संभावना है|


वैज्ञानिकों का कहना है, कि मोबाइल फोन घातक मस्तिष्क ट्यूमर में बढ़ोतरी के पीछे हो सकते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े के अनुसार, 1995 से 2015 के बीच इंग्लैंड में ग्लिओब्लास्टोमा के मामले 983 से बढ़कर 2,531 हो गए| वृद्धि सभी उम्र समूहों में थी और निम्न ग्रेड ट्यूमर के मामलों में गिरावट आई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि “व्यापक पर्यावरणीय या जीवनशैली कारक” इस प्रवृत्ति के लिए ज़िम्मेदार होने की संभावना है, मोबाइल फोन एक संभावित संदिग्ध है|

कैंसर ब्रिटेन के बच्चों के अध्ययन नेता अलास्डेयर फिलिप्स ने कहा: “हमने 21 वर्षों से पूरे संसार में जीबीएम में निरंतर और अत्यधिक महत्वपूर्ण वृद्धि देखी है।

“दिलचस्प बात यह है कि हमें मस्तिष्क के सामने और अस्थायी क्षेत्रों में घटनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई। “यह संदेह उठाता है कि मोबाइल और ताररहित फोन का उपयोग ग्लियोमा को बढ़ावा दे सकता है।”

सहयोगी प्रोफेसर डेनिस हेन्शॉ ने कहा: “हमारे निष्कर्ष केवल इलाज पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इन कैंसर के रुझानों के पीछे तंत्र पर अधिक ध्यान से देखने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।”

आमतौर पर, ग्लिओब्लास्टोमा के निदान के दो साल बाद रोगियों का केवल एक तिहाई जीवित रहता है। अधिकांश 14.6 महीने जीवित रहते हैं।

लेकिन आलोचकों ने चेतावनी दी है कि अध्ययन केवल ट्यूमर निदान दर में एक प्रवृत्ति की पहचान करता है और पर्याप्त साक्ष्य प्रदान नहीं करता है कि मोबाइल दोष दे रहे हैं।

नॉटिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कीथ नील ने कहा: “सुझाव है कि मोबाइल फोन का उपयोग ज़िम्मेदार है, उसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता है।

“55 वर्ष से अधिक के लोगों के आयु दर में वृद्धि अधिक हुयी है, जो मोबाइल फोन का बहुत कम उपयोग करते हैं, और 1 99 5 में बहुत कम मोबाइल फोन का इस्तेमाल होता था जब जन्म दरें उस ज्यादा हुआ करती थी।”

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेविड स्पिगलहेल्टर ने कहा: “पिछले 30 वर्षों में कई चीजें बदल गई हैं और इसलिए मजबूत निष्कर्ष अन्यायपूर्ण प्रतीत होते हैं।”

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डॉ शेर शाहब ने कहा: “यह पत्र इंग्लैंड में विशिष्ट घातक मस्तिष्क ट्यूमर में वृद्धि के सबूत प्रदान करता है। “विश्लेषण से क्या नहीं दिखाता है, कि मस्तिस्क ट्यूमर की वृद्धि मोबाइल फोन के कारण होती है।”

एनएचएस वेबसाइट लोगों को “आवश्यकता से अधिक” मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचने के लिए सलाह देती है और कहती है कि बच्चों को केवल “आवश्यक उद्देश्यों” के लिए उनका उपयोग करना चाहिए।

लेकिन यह कहते हैं: “प्रकाशित शोध की बड़ी समीक्षाओं ने निष्कर्ष निकाला है कि कुल मिलाकर सबूत यह नहीं बताते हैं कि मोबाइल फोन से रेडियो तरंगें स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।”

यूके में लगभग 93 प्रतिशत व्यस्क है जो अत्यधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं|

निष्कर्ष जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित हैं।

हाल के शोध में पाया गया है कि वाईफाई सिग्नल और मोबाइल फोन के संपर्क में एक महिला को गर्भपात का खतरा एक तिहाई से अधिक है।

और पिछले साल एक इतालवी अदालत ने मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग पर शासन करने का फैसला किया, क्योंकि एक व्यक्ति ने मस्तिष्क ट्यूमर विकसित किया|

How to loss Weight and what is the source of Weight loss कैसे अपने मोटापे को कम करे और अपने वजन को घटायें

अपने वजन को घटाने का सबसे आसन और लाभकारी तरीका


भारतीय व्यंजन विभिन्न मसालों की पेशकश करते हैं, जो न केवल आपकी स्वाद कलाओं को झुकाते हैं बल्कि स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। काली मिर्च, जो सुस्त व्यंजन को चटपटे व्यंजन में बदल सकती है, वजन घटाने में आपकी मदद कर सकती है।

काली मिर्च विटामिन A, C और K तथा खनिजों, स्वस्थ Faty Acid से भरी हुई होती है| और एक प्राकृतिक चयापचय बूस्टर (Metabolism Booster) के रूप में काम करती है, जो इसे वजन घटाने सहित अनगिनत स्वास्थ्य लाभों का भंडार बनाती है। इसमें पाइपरिन भी शामिल है।

अपने भोजन में काली मिर्च दाल के खाना खाने के बाद शरीर से कैलोरी जलता है, नई वसा कोशिकाओं के निर्माण को रोकता है और वसा संचय को दबा देता है।

नैदानिक आहार विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ निमामी अग्रवाल और फिट्पास के आहार विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ मेहर राजपूत ने मसाले का उपयोग करने के बारे में कुछ सुझाव दिया है:

* काली मिर्च चबाना उसे चुसना: जो लोग काली मिर्च के जलने वाले गर्म स्वाद को सहन कर सकते हैं वे हर सुबह 1-2 मिर्च के कांटे का उपभोग कर सकते हैं। यह आपके चयापचय को फिर से शुरू करेगा।

* काली मिर्च चाय: चाय में ताजा अदरक और 5 डेन कलि मिर्च को पिस के उबल दे और फिर उसे पीये|

* फल और सब्जी सलाद पर इसे छिड़कें: एक मसालेदार के रूप में काली मिर्च का प्रयोग करें और इसे अपने पसंदीदा सलाद पर आसानी से छिड़क दें। यह न केवल आपकी प्लेट में एक अतिरिक्त स्वाद जोड़ता है बल्कि वजन घटाने में भी सहायता करता है।

* इसे अपना रोजाना पेय जोड़ें: जब कभी भी आप ग्रीष्म ऋतू में निम्बू का शरबत पिए तो काली मिर्च के पाउडर को शरबत में एक चुटकी मिलाये और इससे ताज़ा मसाला-निम्बू-पानी- शरबत बना के पीये| यह न केवल आपका Weight Loss करेगा, बल्कि स्वस्थ आंत और प्रतिरक्षा के लिए भी बहुत ही लाभकारी साबित होगा |

* काली मिर्च का तेल: सादे पानी के गिलास में 100 प्रतिशत शुद्ध काली मिर्च का तेल डालें और नाश्ते से पहले इसका उपभोग करें या इसे सलाद ड्रेसिंग के रूप में इस्तेमाल करने का एक और विकल्प है।

* काली मिर्च, नई वसा कोशिकाओं को रोकता है: काली मिर्च प्लाज्मा और लिपिड प्रोफाइल में फैटी एसिड, ट्राइग्लिसराइड्स, फॉस्फोलाइपिड्स और कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करने में मदद करता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने और शरीर में नई वसा कोशिकाओं के गठन को कम करने में भी मदद करता है।

एक ‘Silent Killer’ के लिए देशव्यापी स्क्रीनिंग Global Drive  में High Blood Pressure के लिए 300,000 भारतीयों की जांच की जाएगी

एक राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान इस महीने High blood pressure के लिए भारत भर में 300,000 से अधिक लोगों को अनियंत्रित High blood pressure का पता लगाने के लिए दूसरी वैश्विक पहल के हिस्से के रूप में जांचने की कोशिश करेगा, एक विकार डॉक्टर अक्सर इसे “मूक हत्यारा यानि Silent Killer” कहते हैं।

मई Measurement महीने 2018 नामक अभियान और बुधवार को लॉन्च किया गया, इस पहल से जुड़े चिकित्सकों ने कहा है कि मरीजों के बड़े अनुपात में अनियंत्रित या खराब इलाज के कारण समय पर निदान और High blood pressure के पर्याप्त नियंत्रण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला जाएगा।

भारत भर में कई हजार डॉक्टरों को सार्वजनिक स्वास्थ्य फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और एसोसिएशन ऑफ फिजियंस ऑफ इंडिया द्वारा समन्वित अभियान में भाग लेने की उम्मीद है। यह रोगियों और जनता के सदस्यों को High blood pressure के लिए “अवसरवादी स्क्रीनिंग” प्रदान करेगा।

आईसीएमआर के एक वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा, “हाइपरटेंशन एक मूक हत्यारा है, लेकिन यह कई रोगियों में अनियंत्रित, इलाज नहीं किया गया है, या खराब नियंत्रित है।”

पहले के अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि High blood pressure वाले लगभग आधे रोगियों को अनियंत्रित रखा जाता है, निदान किए गए आधे में से पर्याप्त उपचार नहीं मिलता है, और उपचार पर आधा उनके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में असमर्थ हैं।

मई 2017 के दौरान पीएचएफआई द्वारा किए गए एक समान अभियान ने पूरे भारत में 280,000 वयस्कों की जांच की थी और High blood pressure से लगभग एक तिहाई पीड़ित पाया था। लेकिन पीएचएफआई में अभियान के संयोजक अरुण जोस ने कहा, लेकिन इस तीसरे में से 50 प्रतिशत अपनी स्थिति से अनजान थे जब तक कि माप नहीं लिया गया।

मई मापन महीने अभियान इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन द्वारा वैश्विक पहल का हिस्सा हैं, जो डॉक्टरों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के गठबंधन ने पिछले साल 80 देशों में उच्च रक्तचाप के लिए दस लाख से ज्यादा लोगों की जांच की थी।

पीएचएफआई में रिसर्च के उपाध्यक्ष डोरैराज प्रभाकरन ने कहा, “हाइपरटेंशन विरोधाभासों की एक बीमारी है – इलाज करना आसान है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण दर बहुत कम है।”

चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि कुछ डॉक्टर स्वयं अपने मरीजों के खराब अनुवर्ती माध्यम से High blood pressure के अपर्याप्त नियंत्रण में योगदान दे सकते हैं या सफल नियंत्रण प्राप्त करने के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन कर सकते हैं।

प्रभाकरन ने कहा कि 160/100 से अधिक blood pressure मूल्यों के निदान रोगियों को निदान पर इलाज किया जाना चाहिए, लेकिन जिन रोगियों के मूल्य 140/90 और 160/100 के बीच हैं, वे मेडिकल थेरेपी की शुरूआत से छह महीने पहले जीवनशैली में बदलाव कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “वजन घटाने, दिन में 30 मिनट के लिए हल्के से शारीरिक व्यायाम, फलों और सब्ज़ियों की खपत में वृद्धि और नमक कम खाने से सभी blood pressure को कम करने में योगदान दे सकते हैं।”

एक वरिष्ठ चिकित्सक और High blood pressure में विशेषज्ञ वेंकट एस राम ने कहा, “मरीजों को मेडिकल थेरेपी शुरू करने की सलाह दी जाती है कि वे blood pressure सीमा के भीतर लौटने के बाद न रोकें।” “हम कभी-कभी इस वाक्यांश को सुनते हैं – ‘थोडा ब्लड प्रेशर है’ – थोडा फ्रैक्चर, थोडा गर्भावस्था, या थोडा ब्लड प्रेशर जैसी कोई चीज नहीं है।”