कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी

छात्राओं से पीड़ित मानवता की सेवा व सुरक्षा करने का दिलाया गया संकल्प

बेतिया : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह न्यायाधीश योगेश शरण त्रिपाठी ने कहा कि मानवाधिकार की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेवारी है। इसके लिए हमें सजग रहना होगा। ताकि, मानवाधिकार कोई उल्लंघन ना कर सके। संविधान ने इस दिशा में हमे पर्याप्त मौलिक अधिकार प्रदान किया है। समता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरूद्ध आवाज उठाने का अधिकार प्रदान किया है। वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में नगर के संत तेरेसा बालिका विद्यालय में सोमवार को आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को भी मानवाधिकार की जानकारी होनी चाहिए। उनके अगल-बगल में उनकी जानकारी में कोई मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है, तो इसकी सूचना वे पुलिस को दे ही साथ-साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भी दे। मौके पर बालिकाओं ने मुख्य वक्ता योगेश शरण त्रिपाठी से मानवाधिकार से जुड़े कई सवाल किए। इन सवालों का जवाब न्यायाधीश योगेश शरण त्रिपाठी ने शिक्षक के अंदाज में बड़ी सहजता से दी। इसके पूर्व बालिकाओं ने पदाधिकारियों का स्वागत फूलों का गुलदस्ता देकर किया। उन्होंने ने भी बालिकाओं को गुलाब सौंपे और जीवन में सफलता हासिल करने का आशीष दिया। बालिकाओं ने इस अवसर पर कैंडल जलाए और मानवाधिकार की रक्षा किए जाने की शपथ ली। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने दीप प्रज्जवलन कर किया। दीप प्रज्जवलन में उनका साथ संत तेरेसा बालिका उच्च विद्यालय की प्राचार्य सिस्टर प्रफुल्ला, अधिवक्ता रमेश चंद्र पाठक, राकेश डिक्रूज आदि ने दिया। कार्यक्रम में अधिवक्ता रमेश चंद्र पाठक, सुनील डिक्रुज, प्राचार्य सहित वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

 

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर

बेतिया : बीआरए बिहार विवि ने टीडीसी पार्ट-वन की परीक्षा के लिए फॉर्म भरे जाने की तिथि घोषित कर दी है। छात्र-छात्राएं बिना विलंब शुल्क के 07 से 15 दिसंबर तक परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे।
इस संबंध में विवि ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसमें बताया गया है कि फॉर्म भरने की तिथि संबंधी जानकारी सभी कॉलेजों में भेज दी गई है। सूत्रों के अनुसार बताया जाता है कि राजभवन के निर्देश पर दिसंबर तक सभी लंबित परीक्षाओं का आयोजन करना है। इसी को देखते हुए विवि की ओर से ऐसी घोषणा की गई है।

NASA ने सफलतापूर्वक एक नई परमाणु रिएक्टर पावर (kilo power) सिस्टम का प्रदर्शन किया है जो चंद्रमा, मंगल और Space के लिए लंबी अवधि के चालित मिशन सक्षम कर सकता है।

Kilo power रिएक्टर का उपयोग स्टर्लिंग प्रौद्योगिकी (क्रस्टी) प्रयोग मार्च के माध्यम से नवंबर 2017 से अमेरिका राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) के नेवादा राष्ट्रीय सुरक्षा साइट पर आयोजित किया गया|

वॉशिंगटन में स्पेस टेक्नोलॉजी मिशन डायरेक्टरेट (एसटीएमडी) के NASA के कार्यकारी सहयोगी जिम जिम रेयूटर ने कहा, “सुरक्षित, कुशल और भरपूर ऊर्जा भविष्य में रोबोट और मानव अन्वेषण की कुंजी होगी।”

“मैं उम्मीद करता हूं कि kilo power परियोजना चंदमा और मंगल पावर आर्किटेक्चर का एक अनिवार्य हिस्सा बनने के रूप में विकसित हो,” Reuter ने कहा।

Kilo Power एक छोटी, हल्के विखंडन प्रणाली है जो 10 किलोवाट विद्युत शक्ति प्रदान करने में सक्षम है – – लगातार कम से कम 10 वर्षों तक कई औसत घरों को चलाने के लिए पर्याप्त है|

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि, चार kilo power इकाइयां outpost स्थापित करने के लिए पर्याप्त शक्ति प्रदान करेंगी।

ग्लेन रिसर्च सेंटर में किलोपॉवर इंजीनियर लीड मार्क गिब्सन ने कहा कि, अग्रणी बिजली व्यवस्था चंद्रमा के लिए आदर्श है, जहां सूरज की रोशनी से बिजली उत्पादन मुश्किल है क्योंकि चंद्रमा रात में पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर होती है।

गिब्सन ने कहा, “kilo power हमें बहुत अधिक बिजली मिशन करने की क्षमता देता है, और चंद्रमा के छायादार क्रेटर का पता लगाने की क्षमता देता है।”

उन्होंने कहा, “जब हम चंद्रमा और अन्य ग्रहों पर लंबे समय तक रहने के लिए अंतरिक्ष यात्री भेजना शुरू करते हैं, तो उसमें एक नई शक्ति की आवश्यकता होगी जिसकी हमें पहले कभी आवश्यकता नहीं पड़ी है।”

प्रोटोटाइप पावर सिस्टम पेपर तौलिया रोल के आकार के बारे में ठोस, कास्ट यूरेनियम -235 रिएक्टर कोर का उपयोग करता है।

निष्क्रिय सोडियम गर्म पाइप ट्रांसफर गर्म उच्च दक्षता स्टर्लिंग इंजन, जो गर्मी को बिजली में परिवर्तित करती है।

एनएनएसए के लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी के मुख्य रिएक्टर डिजाइनर डेविड पोस्टन के अनुसार, नेवादा में हालिया प्रयोग का उद्देश्य दो गुना था:- यह दर्शाता है कि प्रणाली विखंडन शक्ति के साथ बिजली बना सकती है, और यह दिखाने के लिए कि सिस्टम स्थिर और सुरक्षित है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह किस माहौल का सामना करता है।

पोस्टन ने कहा, “हमने इस रिएक्टर में नाममात्र और ऑफ-सामान्य परिचालन परिदृश्यों और उड़ान रंगों के साथ पारित क्रिस्टी के मामले में जो कुछ भी कर सकता था, उसे फेंक दिया।”

kilo power को टीम ने चार चरणों में प्रयोग किया। NASA ने कहा कि बिजली को बिना आयोजित किए गए पहले दो चरणों में पुष्टि हुई कि, प्रणाली के प्रत्येक घटक की अपेक्षा की जाती है।

तीसरे चरण के दौरान, टीम ने अंतिम चरण में जाने से पहले मूल रूप से कोर को गर्म करने की शक्ति में वृद्धि की।

प्रयोग 28 घंटे, पूर्ण-शक्ति परीक्षण के साथ समाप्त हुआ जिसने एक मिशन को अनुकरण किया, जिसमें रिएक्टर स्टार्ट-अप, पूर्ण शक्ति, स्थिर संचालन और शटडाउन शामिल है।

पूरे प्रयोग में, टीम ने बिजली में कमी, असफल इंजन और असफल गर्म पाइप अनुकरण किया, अतः यह दर्शाता है कि सिस्टम संचालित हो सकता है और कई विफलताओं को सफलतापूर्वक संभाल सकता है।

Rahul Gandhi addressing ‘Save the Constitution’ at Talkatora Stadium Delhi

While addressing the Constitution Save Rally at Talkatora Stadium of Delhi, Congress President Rahul Gandhi fiercely attacked the Modi Government BJP and RSS.

While launching the ‘Save the Constitution’ campaign, Rahul Gandhi Said that the toilet which cleanses, which smells, what is the spirituality of it, has anyone felt the spirituality, which man of Balmiki Society feels? Seeing Modi’s slogan of Murdabad, Rahul Gandhi shouted in the middle that we do not speak about Murdabad on anybody in Congress. Rahul Gandhi while addressing PM Modi and said that now everyone has realized that there is no place for Dalits, Women, Weak people in PM Modi’s heart.

He said that Neerav is the case of Modi, Lalit Modi and Mallya, in which the government seems to be saving. Speak to my 15 minutes, Modi Ji. I will talk about Neerav Modi, Mallya, Modi Ji will not able to stand there. Neerav Modi runs away with so much money, But Modi didn’t say anything.

Rahul said that Modi told his minister that spice up the media person. Shut up, the country will listen to my mind only and BJP MPs will not speak, Jaitley will not speak, no one will speak, only Narendra Modi will speak. In the event of the rape, Rahul said that women are raped, rape of 8-year old girl, rape in Unnao, but Modi did not say anything even once. Modi went to London and Chief of the IMF said that Modi is not respecting the women of their country.

He said that the country’s reputation throughout the world was ruined by PM Modi. In 70 years, the Congress party created the credibility of Hindustan in all over the world, but Modi Ji ruined it and hurt our image. We have to protect our Constitution.

क्या है अविश्वास प्रस्ताव? मोदी सरकार पर क्या होगा इसका प्रभाव?

ज्ञातव्य हो कि सोमवार को संभवतः लोकसभा में वाई एस आर कांग्रेस द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है जिसका समर्थन तीन दिन पहले तक एनडीए का हिस्सा रह चुकी तेलेगु देशम पार्टी करेगी और उसकी दलील है कि एनडीए सरकार ने आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और जनभावना का सम्मान नहीं किया| अन्य भी कई पार्टियों ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का ऐलान किया है|

अविश्वास प्रस्ताव एक संसदीय व्यवस्था है जिसके अंतर्गत विपक्ष या अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा सरकार को गिराने के लिए, कमजोर करने के लिए या दबाव बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया जाता है| कभी-कभी यह विपक्ष द्वारा नहीं बल्कि सरकार का हिस्सा रहे खास सहयोगी द्वारा भी सरकार के विरुद्ध लाया जाता है| हालांकि ऐसे उदाहरण दुर्लभ है परन्तु गठबंधन में किसी मुद्दे पर असहमति या गठबंधन में टूट के पश्चात ही यह साधारणतः देखा जाता है| यह केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है| अविश्वास प्रस्ताव सदन में लाने के लिए न्यूनतम पचास सांसदों का समर्थन जरुरी है| अगर सरकार विश्वास मत हासिल करने में विफल होती है तो सरकार को त्याग पत्र देना होता है या संसद को भंग करना और आम चुनाव का अनुरोध करना होता है|

दुनिया में पहला अविश्वास प्रस्ताव मार्च 1782 में ब्रिटेन की संसद में पेश किया गया था| हालांकि अविश्वास प्रस्ताव को प्रचलित होने में समय लगा और 19वीं सदी के मध्य तक यह व्यवस्था सरकार गिराने का मजबूत विकल्प बन चूका था| भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के खिलाफ 1963 में जे. बी. कृपलानी द्वारा लाया गया था और उस समय कांग्रेस का कोई मजबूत विकल्प नहीं था| अतः यह प्रस्ताव महज एक औपचारिकता बन के रह गया और 347 वोट के साथ नेहरु सरकार बचाने में सफल रहे जबकि सरकार के विरुद्ध केवल 62 वोट पड़े|

 

 

वर्तमान परिदृश्य में देखा जाये तो मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ 2014 में सत्ता में आई जब यह मानसिकता बन चुकी थी कि कोई पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार नहीं बना सकती| अतः एक अभूतपूर्व एवं बीजेपी के रूप में कांग्रेस का मजबूत विकल्प भारतीय राजनीति को मिला एवं इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी के बाद मजबूत एवं लोकप्रिय प्रधानमंत्री| चार साल में 2महीने कम समय व्यतीत कर चुकी मोदी सरकार के खिलाफ NDA के ही सहयोगी रह चुकी TDP के एन. चंद्रबाबू नायडू अब YSR कांग्रेस द्वारा लायी जाने वाली अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बयान दिया है|

 

 

बीजेपी का अविश्वास प्रस्ताव से रिश्ता पुराना है और अतीत में जाये तो सबसे रोचक घटना तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लाया गया अवविश्वास प्रस्ताव याद आता है| 17 अप्रैल 1999, जब 13 महीने से चल रही वाजपेयी सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो मात्र 1 वोट से हार गयी और इस तरह सरकार गिर गयी| अनेक रोचक घटनाए इस हार में सामने आई| जब NDA सहयोगी जयललिता की पार्टी AIDMK गठबंधन से अलग हो गई| मायावती ने अविश्वास प्रस्ताव का हिस्सा न बनने का ऐलान करने के बावजूद वोटिंग करने पहुँची| और भी कितने राजनैतिक चहलकदमी हुई| एड़ी-छोटी की इस जंग में वाजपेयी सरकार 13 महीने में गिर गयी हालांकि अगले आम चुनाव में श्री वाजपेयी के नेतृत्व में पुनः NDA की सरकार बनी और पांच साल तक अपना कार्यकाल भी पूरी की परन्तु इस दौरान भी चार साल पूरा कर चुकी वाजपेयी सरकार के खिलाफ कांग्रेस 2003 में अविश्वास प्रस्ताव  लेकर आई, और यह प्रस्ताव भरी अंतर से गिर गया| तत्कालीन कांग्रेस प्रवक्ता एस. जयपाल रेड्डी का कथन था कि “अविश्वास प्रस्ताव सरकार गिराने के लिए नहीं लाया गया है| सरकार कि शक्ति परिक्षण के लिए नहीं है बल्कि चार साल के कार्यकाल के उपलब्धियों के पोल खोलने के लिए है|”

 

 

आज के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो बहुमत को लेकर NDA में संशय नहीं है यधपि कुछ सहयोगियों का टूटना एवं शिवसेना जैसे सहयोगी जो आंख दिखने से चुकते नहीं है एवं अवसर मिलते ही सरकार के खिलाफ मुखर रहे है, उनकी भी मतों को हटाकर मोदी सरकार विश्वास मत हासिल तो कर लेगी| अतः 2003 के तरह ही इस बार भी विपक्षी पार्टियों का उद्देश्य सरकार गिराना तो नहीं है परन्तु इसे पीछे का वह दुर्गामी एजेंडा है जो 2019 के लिए सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है|

सम्पूर्ण भारत में मोदी के खिलाफ जो माहौल तैयार हो रहा है उसका यह शुरुआत कहा जा सकता है| अतः यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के लिए यह प्रस्ताव तत्काल हानिकारक नहीं है, परन्तु सरकार के वजूद पर प्रश्न उठना, सरकार के कार्यकलापों पर प्रश्नचिंह 2019 में मोदी को आक्रमक चुनावी नीतियों को अमल कराना एवं जनता का विश्वास हासिल करना आसान नहीं होगा|