पादरी दुसैया में उत्साह के साथ मनाया गया माता मरियम का वार्षिकोत्सव

पादरी दुसैया में उत्साह के साथ मनाया गया माता मरियम का वार्षिकोत्सव

—– भव्य कार्यक्रम का आयोजन, माता के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
—– नगर के प्रधान गिरिजाघर से पादरी दुसैया के लिए निकाली गयी आकर्षक धार्मिक यात्रा
—– तीर्थस्थल के रूप में मशहूर हो चुका ग्वादालूपे माता मरियम का निवास स्थल, पूरी करती है, मुराद
—– मेक्सिको शहर के तेपेयाक घाटी से लाया गया है, ग्वादालूपे की माता का दुर्लभ तस्वीर,

बेतिया: ग्वादालूपे माता मरियम का वार्षिकोत्सव रविवार को पादरी दुसईया पल्ली में पूरे धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर यहां विभिन्न धर्मप्रांन्तों से श्रद्धालुओं भारी भीड़ उमड़ी और माता की विशेष पूजा-अर्चना की। नगर से सटे पादरी दुसैया में आयोजित माता के वार्षिक पर्व में पटना और मुजफ्फरपुर महाधर्म प्रांत के मह धर्माध्यक्ष फादर ऐगास्टियन व फादर क्राजेटन फ्रांसिस ओस्ता शामिल होकर पर्व के उत्साह में चार चांद लगा दिया। मुख्य चर्च से लेकर पादरी दुसईया के चर्च तक कार्यक्रम की धूम रही। मां मरियम के तीर्थस्थल के रूप में शुमार पादरी दुसईया में स्थानीय श्रद्धालुओं का जनसैलाब भी उमड़ पड़ा। पर्व का आगाज एक दिसंबर को माता मरियम की तस्वीर के झंडोतोलन के साथ से ही शुरू हो गया। रविवार को आयोजित वार्षिक पर्व मे पटना महाधर्म प्रांत के फादर ऐगास्टियन, बेतिया धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष पीटर सेबारिस्टयन गोवियस, मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष काजेटन फ्रांसिस ओस्ता, दुसैया पल्ली पुरोहित जोसेफ डिसोजा तथा अन्य सहयोगी पल्ली पुरोहितों ने समारोही मिस्सा बलिदान धार्मिक संस्कार संपन्न कराया। इसके पूर्व नगर के प्रधान गिरजाघर से श्रद्धालुओं ने भव्य ने भव्य शोभायात्रा निकाली। माता मरियम का जयघोष करते हुए शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए पादरी दुसईया चर्च पहुंची, जहां दुसैया पल्ली ने यात्रियों का शानदार स्वागत किया। यात्रा क्रम में श्रद्धालुओं ने माता की जय-जयकार की। पल्ली पुरोहितों ने धर्म पर उपदेश देकर श्रद्धालुओं को एक सुन्दर व सफल जीवन जीने की राह दिखायी। मौके पर बीमार लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के ईश्वर से विशेष प्रार्थना की। सबसे मुख्य धार्मिक कार्यक्रम पाप स्वीकार सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कई श्रद्धालु माता मरियम के समक्ष प्रस्तुत हुए और अपना पाप स्वीकार किया। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे दिल व निश्चल मन से अपना पाप स्वीकार करता है, माता मरियम उनके पाप को समाप्त कर देती हैं।

 

पल्ली पुरोहित का स्वागत करती महिला श्रद्धालु

 

बड़ा नाम है ग्वादालूपे मां मरियम का, पूरा करती मुरादें

पादरी दुसैया स्थित ग्वादालूपे माता मरियम का बड़ा नाम है। उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली है। माता करामाती है। मां मरियम के दरबार में पहुंचने वाले भक्त कभी निराश नहीं लौटते है। सच्चे दिल से लोग यहां मन्नत मांगते है। माता उनकी सभी मुरादें पूरा करती हैं। पुत्रहीनों पर माता विशेष दया करती है, जो भक्तिपूर्वक माता की आराधना करते है, उन्हें माता संता प्रदान करती हैं। चर्च में स्थापित माता मरियम की तस्वीर काफी दुर्लभ माना जाता है। इसका रोचक इतिहास है। बताया जाता है कि चमत्कारी दयालू माता मरियम की यह दुर्लभ तस्वीर मैक्सिको देश के ग्वादालूपे शहर अवस्थित तपेयाक पहाड़ी पर बने एक चर्च से लाया गया है। इस दुर्लभ तस्वीर को अमेरिकी पुरोहित बाब रार्बट लुडिविक ने लाया था। मान्यता है कि यह यह माता बड़ी जाग्रत है। मैक्सिको के ग्वादालूपे शहर में माता के प्रकट होने का एक रोचक हिस्सा है। पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ डिसूजा ने बताया कि ग्वादालूपे माता मरियम की कहानी की शुरूआत सन 1531 माह दिसंबर में मैक्सिको शहर के तेनोकाटिटलन गांव से हुई। यहां माता ने जुआन दियेगो नामक युवा किसान को चार बार दर्शन दी।

 

महा गिरजाघर का परिक्रमा करते श्रद्धालु

 

वे एक नए ईसाई थे और एक दिन पवित्र मिस्सा बलिदान में भाग लेने जा रहे थे। रास्ते में एक सुंदर स्त्री जिसका सारा बदन रोशनी से चमक रहा था। अचानक जुआन दियेगो के सामने प्रगट हो गई। पक्षियों के मधुर संगीत के बीच माता ने कहा कि मैं संपूर्ण तथा नित्य संत मरिया हूं। जुआन दियेगो को उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे उनकी करूणामयी मां है और सभी तरह के लोगो से प्यार करने के लिए यहां आई हूं। वह मैक्सिको शहर के तपेयाक घाटी पर जहां वह खड़ी वहां उनके आदर ने एक चर्च बनवाना है। दर्शन के बाद जुआन दियेगो भागते हुए अपने धर्माध्यक्ष जुमर्रागा के पास गया और स्थिति से अवगत कराया। लेकिन धर्माध्यक्ष ने उसकी बात मामने से इनकार कर दिया और इसके पक्ष में सबूत लाकर देने की बात कही। कई बार कहने के बाद भी जब धर्माध्यक्ष ने उनकी बात नहीं मानी तो वे निराश होकर बाहर निकले। तब धर्माध्यक्ष ने उनके पीछे अपने लोगों को लगा दिया। इसी क्रम 12 दिसंबर 1531 में माता ने चौथी बार दर्शन दिया और कहा कि मैं अपने अस्तित्व का साक्ष्य दूंगी। माता ने तपेयाग घाटी उगी केस्तलियन फूल समेट कर जुआन दियेगो के अंगोछे में दिया, वह उस फूल को धर्माध्यक्ष के पास ले गया और जैसे वहां अंगोछा खोला सुंदर फूल माता मरियम के सुंदर तस्वीर के रूप में परिवर्तित हो गया। उसी दुर्लभ तस्वीर की प्रतिलिपि अमेरिकी पूरोहित बाब रौबर्ट लुडविक ने भारत आने के क्रम में यहां लाए थे।

यात्रा में भाग लेते श्रद्धालु

 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *